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केंद्रीय राज्यमंत्री जॉर्ज कुरियन ने अपने पद से दिया इस्तीफा, कहीं ये वजह तो नहीं

 Edited By: Kajal Kumari @lallkajal
 Published : Jun 23, 2026 10:18 am IST,  Updated : Jun 23, 2026 12:42 pm IST

एक बड़ी खबर सामने आ रही है। अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से राष्ट्रपति ने स्वीकार भी कर लिया है।

जॉर्ज कुरियन- India TV Hindi
जॉर्ज कुरियन

नई दिल्‍ली: अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया है। भारत के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर संविधान के अनुच्छेद 75 के खंड (2) के तहत, केंद्रीय मंत्रिपरिषद से जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया है। जॉर्ज कुरियन केरल बीजेपी के नेता हैं, उन्हें राज्य में हुए विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राज्यसभा में लाया गया था और 21 जून को जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा का कार्यकाल समाप्‍त हो गया था।

बता दें कि भाजपा ने पहले ही संकेत दे दिया था कि वह जॉर्ज कुरियन को फिर राज्‍यसभा नहीं भेज रही है। पार्टी ने जॉर्ज कुरियन की जगह मध्य प्रदेश से भारतीय जनता पार्टी के महासचिव तरुण चुग को राज्यसभा का टिकट दिया था। बता दें कि दो केंद्रीय मंत्रियों-रवनीत सिंह बिट्टू और कुरियन को 18 जून को हुए राज्यसभा चुनावों के लिए भाजपा ने दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया था।


कौन हैं ​जॉर्ज कुरियन?
जॉर्ज कुरियन अगस्त 2024 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली तीसरी केंद्रीय कैबिनेट में राज्य मंत्री (MoS) के तौर पर काम कर रहे थे, उनकी उम्र 65 साल की है और वह बीजेपी के एक सीनियर नेता हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि कुरियन साल 1980 में पार्टी के बनने के समय से ही इसके सदस्य रहे हैं। मोदी कैबिनेट में कुरियन मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री का प्रभार भी संभाल रहे थे। केंद्रीय कैबिनेट में वेएकमात्र ऐसे मंत्री थे जो ईसाई समुदाय से आते हैं। 

भाजपा के लिए क्यों थे खास?
कुरियन केरल के कोट्टायम से हैं और पहले इस दक्षिणी राज्य में बीजेपी यूनिट के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। पेशे से वकील कुरियन टीवी डिबेट्स में एक जाना-पहचाना चेहरा रहे हैं। उन्हें अक्सर केरलम के दौरों के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के भाषणों का मलयालम में अनुवाद करते हुए देखा जाता था। उन्हें 2024 में केंद्रीय कैबिनेट में शामिल किया गया था। इस कदम को केरलम में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए ईसाई समुदाय तक पहुंचने की बीजेपी की कोशिश के तौर पर देखा गया था।

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